Dr Kondekar ki autism ki nau Dohi
ऑटिज़्म पर नौ दोहे
१. स्थिरता और ध्यान
तन-मन जब स्थिर रहें, जागे सच्चा ध्यान।
आँख-कान जब सजग हों, खुलता सीखने ज्ञान।
जितना गहरा ध्यान हो, उतना गहरा ज्ञान।
स्थिरता से सीखता, बालक अपना जहान।
२. पहले सुनना-समझना
करने वाली दुनिया से, पहले सुनना सीख।
सुनकर समझे अर्थ को, फिर करने की सीख।
आँख-कान से जगत को, पहले ले पहचान।
समझ बने आधार जब, तब सार्थक हो ज्ञान।
३. रिश्तों की शुरुआत घर से
रिश्ते घर से जुड़ें पहले, घर से बने संवाद।
माँ-बाप और परिवार से, जागे प्रेम-प्रसाद।
घर में जिसने मित्रता, सीखी सहज-समान।
बाहर की दुनिया में फिर, आसान हो पहचान।
४. समाजीकरण घर से
बाहर बच्चों की भीड़ में, मत ढूँढो सामाजिकता।
घर में संवाद जगाइए, वहीं बने आत्मीयता।
परिवार से बातचीत, परिवार से व्यवहार।
घर से निकले सामाजिकता, घर से निकले प्यार।
५. भाषा, बुद्धि और विचार
बातों से भाषा बढ़ती, संवादों से विचार।
प्रश्न-जवाब की चर्चा से, खुलता बुद्धि-द्वार।
शब्द अकेले भाषा नहीं, अर्थ बने आधार।
बोलना जब विचार बने, तब संवाद साकार।
६. मैत्री और संवाद
मैत्री केवल साथ नहीं, मन से मन का मेल।
सुनना, समझना, उत्तर देना, संवादों का खेल।
पहले घर में बात बने, फिर जग से व्यवहार।
संवाद जहाँ जीवित हो, वहीं खिलता संसार।
७. शिक्षा और संस्कार
शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, संस्कारों का मान।
आचरण जब शुद्ध हो, शुद्ध बनें विचार।
जैसा बच्चा देखता, वैसा करे व्यवहार।
घर के संस्कारों से ही, बनता उसका संसार।
८. डॉ. कोंडेकर का मूल संदेश
पहले स्थिरता, फिर ध्यान, फिर सुनना-समझना सीख।
फिर भाषा, विचार, संबंध—धीरे-धीरे बढ़ती सीख।
घर बने पहला विद्यालय, परिवार पहला संसार।
यहीं से शुरू सामाजिकता, संवाद और व्यवहार।
९. घर से शुरू संसार
तन-मन जब स्थिर रहें, जागे सच्चा ध्यान।
सुन-समझकर सीखता, बालक अपना ज्ञान।
घर से भाषा, घर से रिश्ते, घर से बने विचार।
My Autism Guru कहे—घर से शुरू संसार।
myautismguru.com
Poem by Dr. Kondekar
91-9869405747
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